टूलकिट
"टूलकिट" यह सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही पक्षों में काम करता है। सामान्य अर्थ में कहें तो उद्देश्य की प्राप्ति के लिये योजना।परन्तु वर्तमान समय में नकारात्मकता फैलाने में ही प्रयोग हो रहा है।
टूलकिट का प्रयोग पहले भी होता था,तब वह पत्र पोस्टर आदि का माध्यम था जिसका स्वरूप अब प्रवर्तित होकर डिजिटल हो गया है।
टूलकिट में ऐसा क्या होता है- उद्देश्य प्राप्ति के लिये जैसे आन्दोलन आदि को बढ़ाने के लिये विस्तृत स्वरूप देने के लिये रूप रेखा तैयार की जाती है।जिसमे कुछ बिंदु(पॉइंट) लिखे होते हैं उन्ही बिंदुओं पर मुख्य रूप से कार्य होता है। जिसके लिये - दिन,समय आदि निर्धारित किया जाता है तथा उक्त निर्धारित दिवस समय आदि पर समर्थक जन निम्नांकित बिंदुओं के अनुसार कार्य करते हैं। (सामान्य अर्थ कहें तो रूपरेखा तैयार कर,उक्त के अनुसार ही कार्य करना)
पहले टूलकिट कैसे काम करता था- प्रयोगकर्ताओं के द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर,मुख्य भीड़ भाड़ वाले आवाजाही मार्गों पर, गली मोहल्लों झुग्गगियों आदि में गुपचुप तरीकों से पोस्टर लगा दिए जाते थे। गुप्त सूत्रों के माध्यम से सूचना अपने जनों तक पहुंचा दी जाती थी।निर्धारित निश्चित दिवस समय आदि पर समर्थक जन निम्नांकित बिंदुओं के अनुसार कार्य करते थे। आदि प्रकारों से उद्देश्यों की प्राप्ति की जाती थी।
वर्तमान में सभी क्षेत्रों में आधुनिकीकरण की दौड़ है, जिस दौड़ में की सभी भाग रहे हैं,जो जितना तेज भागेगा वह उतना ही जल्दी प्रसिद्ध होगा,और इसी प्रसिद्धि के लिये टूलकिट के लिये भी डिजिटल का सहारा लिया जा रहा है।
डिजिटल में कैसे कार्य करता है- सोशल मीडिया में जैसे -ट्विटर फेसबुक इंस्टाग्राम आदि मीडिया प्लेटफार्म पर हैशटैग में शीर्षक के साथ पक्ष के समर्थन में लिखना है । जिसके साथ कुछ फोटो वीडियो आदि छोटी छोटी क्लिप बनाकर पोस्ट करनी होती हैं।अब जितने भी उस घटना आंदोलन आदि के समर्थक होंगे वे उस हैशटैग में लिखी पोस्ट लाइक कमेंट शेयर आदि करेंगे,जिससे उनके आंदोलन आदि को अधिक से अधिक जन धन बल आदि का समर्थन मिल सके।
~महेश तिवारी
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