संदेश

संस्कृत में प्रार्थना पत्र

 सेवायाम्             श्रीमन्त:/श्रीमत्या प्रधानाचार्य जी               (विद्यालय नाम-)...... महोदय           सविनयनम्रनिवेदनमिदमस्ति यदहमावश्यक कारणेन विद्यालये उपस्थितुं नैव शक्नोमि।         अतः दिनांक.../......../ 2024 त: ....../......./2024 पर्यंतमवकाशं ददातु,महती कृपा भविष्यति।                                                                       भवन्तः आज्ञाकारी शिष्य:                                                   नाम-                                            ...

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस ( बिन्दुवार अध्ययन)

 उत्तराखंड राज्य की सर्वप्रथम मांग 1887 ई. में उठी थी,ततपश्चात भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की इकाई ने उत्तराखंड में स्वाधीनता संग्राम के दौरान 1913 में कांग्रेस के अधिवेशन में उत्तराखंड से अत्यधिक प्रतिनिधि सम्मिलित हुए । 1916 में  सितम्बर माह में हरगोविंद पन्त,गोविंद वल्लभ पन्त,बद्रीदत्त पांडेय, इंद्र लाल साह, मोहन सिंह दडमवाल, चंद्र लाल साह, प्रेम वल्लभ पांडे, भोला दत्त पांडे, और लक्ष्मी दत्त शास्त्री आदि युवकों द्वारा कुमाऊँ परिषद का गठन किया गया,जिसमे इनकी जिम्मेदारी आर्थिक व सामाजिक समस्याओं का समाधान निकालना था। इन्ही युवकों द्वारा  1923 व 1926 के प्रांतीय काउंसिल के चुनाव में प्रचंड विजय प्राप्त की। 1940 में हल्द्वानी सम्मेलन में बद्रीदत्त पांडेय ने  पर्वतीय क्षेत्र को विशेष दर्जा देने व अनसूया प्रसाद बहुगुणा ने  कुमाऊँ- गढ़वाल के पृथक इकाई का मांग रखी। 1954 में  उत्तर प्रदेश विधान परिषद में  विधान परिषद के सदस्य इंद्र सिंह नयाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पन्त के  कार्यकाल में पर्वतीय क्षेत्र की पृथक विकास योजना की मांग रखी। ( 1950 त...

हिंदी दिवस पर निबंध

                                                                          महेश तिवारी                                                                          8006820395 * प्रस्तावना -* वर्तमान में उद्देश्य की उपेक्षा ही प्रतीत होती दिखी है, परन्तु संघर्षरत प्रयत्नरत रहते हुए भी स्वदेश के साथ ही साथ 100 से अधिक देशों के विश्वविद्यालयों में  विषयों/पाठ्यक्रम के रूप  में स्थान प्राप्त कर अध्ययन अध्यापन होता है। तो उपेक्षा तो  हुयी कुछ निरर्थक उन्मादी तत्वों के कारण,फिर भी  अपनी योग्यता ,वैज्ञानिकता,विशिष्टता, सरलता,सर्वसुलभता आदि के आधार पर इतने अधिक देशों में महत्वता प्राप्त तथा उपयोगिता सिद्ध कर रही है।...

टूलकिट

                                                                           "टूलकिट" यह सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही पक्षों में काम करता है। सामान्य अर्थ में कहें तो उद्देश्य की प्राप्ति के लिये योजना।परन्तु वर्तमान समय में नकारात्मकता फैलाने में ही प्रयोग हो रहा है। टूलकिट का प्रयोग पहले भी होता था,तब वह पत्र पोस्टर आदि का माध्यम था जिसका स्वरूप अब प्रवर्तित होकर डिजिटल हो गया है। टूलकिट में ऐसा क्या होता है-   उद्देश्य प्राप्ति के लिये जैसे आन्दोलन आदि को बढ़ाने के लिये विस्तृत स्वरूप देने के लिये रूप रेखा तैयार की जाती है।जिसमे कुछ बिंदु(पॉइंट) लिखे होते हैं उन्ही बिंदुओं पर मुख्य रूप से कार्य होता है। जिसके लिये - दिन,समय आदि निर्धारित किया जाता है तथा उक्त निर्धारित दिवस समय आदि पर समर्थक जन निम्नांकित बिंदुओं के अनुसार कार्य करते हैं। (सामान्य अर्थ कहें तो रूपरेखा तैयार कर,उक्त ...

भाषा विज्ञान

                                                                   महेश तिवारी                                                               मो.न.८००६८२०३९५ प्रस्तावना  भाषा के द्वारा मनुष्य अपने भावों विचारों को दूसरों के सामने प्रकट करता है।अपनी भाषा को सुरक्षित रखने व काल की सीमा से निकालकर अमर बनाने कि ओर मनीषियों का ध्यान गया व अनुभव किया कि उच्चारण में जो प्रयोग हो रहे हैं इनकी संख्या निश्चित है।बाद में उच्चारित ध्वनियों के लिए अलग अलग चिह्न निर्धारित किये गये जिन्हे लिपि या वर्ण कहते है । वैदिक     ऋषियों ने सर्वप्रथम ऋग्वेद ( म010.सू 0125 ) में वाग् सूक्त के 8 मंत्रो में इस विषय की ओर ध्यान आकृष्ट किया है कि " वाग - तत्व या भाषा हीवह दिव्य...