भाषा विज्ञान
महेश तिवारी मो.न.८००६८२०३९५ प्रस्तावना भाषा के द्वारा मनुष्य अपने भावों विचारों को दूसरों के सामने प्रकट करता है।अपनी भाषा को सुरक्षित रखने व काल की सीमा से निकालकर अमर बनाने कि ओर मनीषियों का ध्यान गया व अनुभव किया कि उच्चारण में जो प्रयोग हो रहे हैं इनकी संख्या निश्चित है।बाद में उच्चारित ध्वनियों के लिए अलग अलग चिह्न निर्धारित किये गये जिन्हे लिपि या वर्ण कहते है । वैदिक ऋषियों ने सर्वप्रथम ऋग्वेद ( म010.सू 0125 ) में वाग् सूक्त के 8 मंत्रो में इस विषय की ओर ध्यान आकृष्ट किया है कि " वाग - तत्व या भाषा हीवह दिव्य...